Saturday, January 15, 2011

धन के मामले में बेहद होशियार भारतीय

साक्षरता के मामले में भारत का रिकॉर्ड भले ही बेहद खराब रहा हो, लेकिन वित्तीय साक्षरता के मामले में अब यह दुनिया के अव्वल देशों में शामिल है। पैसा संभालने और इसे निवेश करने को लेकर भारतीय अमेरिका, स्पेन, कोरिया जैसे विकसित देशों के नागरिकों से ज्यादा होशियार हैं। एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के मुताबिक जीवन बीमा खरीदने से लेकर आपातकालीन स्थिति के लिए पैसा सहेजने के मामले में भारतीय बेजोड़ हैं। हालांकि कर्ज लेने में भी भारतीय अब ज्यादा उदार होने लगे हैं। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान आइएनजी ने भारत, जापान, अमेरिका, मेक्सिको, हॉलैंड, रोमानिया, कोरिया, स्पेन, बेल्जियम और पोलैंड के ग्राहकों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण को शुक्रवार को प्रकाशित किया है। इसके मुताबिक जापान के बाद भारतीय ही बचत या वित्तीय उत्पाद खरीदने में ज्यादा बुद्धिमता दिखाते हैं। सर्वेक्षण ने 55 फीसदी भारतीयों को वित्तीय साक्षर पाया है। 84 फीसदी भारतीय बजट के मुताबिक ही घर चलाने की कोशिश करते हैं। जबकि दुनिया में यह औसत सिर्फ 30 फीसदी का है। भारतीय अपने पैसे का बेहतर तरीके से प्रबंध जरूर कर लेते हैं लेकिन जरूरत पड़ने पर ये कर्ज लेने से नहीं हिचकते। वित्तीय संकट में फंसने पर 19 फीसदी भारतीयों ने कहा है कि वे कर्ज ले कर काम चला लेंगे। जबकि दुनिया में यह औसत सिर्फ 16 फीसदी का है। 50 फीसदी भारतीयों ने कहा है कि वे कर्ज ले कर घर खरीदना चाहेंगे। जबकि 43 फीसदी ने कर्ज ले कर कार या कोई अन्य वाहन लेने की बात कही है। औसत आय काफी कम होने के बावजूद 83 फीसदी भारतीयों ने आपातकालीन परिस्थितियों के लिए पैसा रखने की बात कही है। दूसरी तरफ दुनिया में सिर्फ 33 फीसदी लोग ही आपात समय के लिए पैसा रखते हैं। सर्वेक्षण का मानना है कि भारत की तेज आर्थिक विकास दर और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि का असर लोगों के वित्तीय सोच-समझ पर भी पड़ रहा है। इस वजह से भारतीयों का विश्वास बढ़ता जा रहा है। 49 फीसदी भारतीयों ने कहा है कि वे अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं। तमाम तरह के उपभोक्ता बिलों के भुगतान में भी भारतीयों का रिकॉर्ड काफी बेहतर है। 73 फीसदी भारतीयों ने कहा है कि वे अपने तमाम बिलों का भुगतान समय पर करते हैं। जबकि अमेरिका में 67 फीसदी लोग समय पर बिल की अदायगी करते हैं। मासिक खर्चे के बारे में भारतीयों ने कहा है कि वे 22 फीसदी आमदनी खाने पीने पर, 18 फीसदी आवास पर, यातायात पर 12 फीसदी, कपडे़ पर 11 फीसदी, मनोरंजन पर नौ फीसदी खर्च करते हैं। जबकि 20 फीसदी राशि बचाते हैं।